फटा नोट

वो नोट जो फटा था, मेरी जेब में पड़ा था। बैचेन मन उसका बड़ा, देखूँ मैं सारा जहां। ठुकराया गया ना जाने, कितनी चौखटों से। पर्तदर लिपटी हुई , ,,, सहमी सी तन्हाई…

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