ग़ज़ल

दिख रहा है आदमी से आदमी जलता हुआ । क्या ज़माना आ गया है, बाग़ भी सहरा हुआ । आँख में पानी नहीं है.... खूँ भरा कैसे मगर, मर्सिया सब पढ़ रहें हैं,…

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संस्कार

संस्कार अनिल "क्या मां आजकल बाबूजी को क्या हो गया है जब देखो वह पूनम और रवि को संस्कारों का भाषण देते रहते हैं| और घर में कोई भी रिश्तेदार या उनके मित्र…

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