मूक दर्शक

विधि का विधान नहीं है यह, जो पाप यहां हर रोज़ होता है पापियों का है बड़ा जमघट जो इन घटनाओं को अंजाम देता है नौ महीने कोख में रखकर जन्म देती है…

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रहनुमा अक्स

पिघलती रौशनी में यादों का रक़्स, गुज़रे जन्म की गलियों में गुम शख़्स, कलियों की ओस उड़ने से पहले का वक़्त। शबनम में हरजाई सा रंग आया है, जबसे तेरे अक्स को रहनुमा…

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नजर का नजराना

मेरे महबूव सनम तेरी नजर के नजराने से मैं नजरबंद हो गया हूँ मैं नजरबंद हो गया हूँ।.....   मेरा इश्क की कहानियों से न था कोई बास्ता जब से मिली हो तुम…

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जिस्म में खूँ की रवानी का मज़ा आएगा

जिस्म में खूं की रवानी का मज़ा आएगा। इश्क होते ही जवानी का मज़ा आएगा। जोश गुफ्तार में कुछ और बढ़ा लो अपने। तब ही कुछ शोला बयानी का मज़ा आएगा। आज हम…

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