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जिन्दगी Archives - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

मुकाम

यह समुन्दर के किनारे से गुजरती राह की मंजिल तुम कहाँ तक जाओगी जो जो निशान छोड़ रही तुम अपने वजूद के इस रेत की जमीन पे समुन्दर की लहर उसे तभी की…

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अफसुर्दगी की कहानी।

एक नई गजल :- समन्दर के लबों पर तिष्नगी है। मुझे इस बात की अफसुर्दगी है।। वहाँ अपनी भलाई देख लेते। जहाँ मौजूद तेरी बन्दगी है।। चमक फीकी कभी होती नहीं है। अगर…

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वक्त

हर खुशी है लोगों के दामन में पर एक हँसी के लिए वक्त नहीं, दिन-रात दौड़ती दुनिया में ज़िंदगी के लिए ही वक्त नहीं, माँ की लोरी का एहसास तो है पर माँ…

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ये जिन्दगी

ये जिन्दगी हे, बस यूं ही कटती चली जायेगी, क्या होगा इसका ये नहीं कोई बता पायेगा, कोई हंसते, कोई रोते तो कोई रूलाकर छोड जायेगा, बीत गया इसका पल वो सुहाना नही…

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पड़ाव

तरही गजल :- देखा नहीं है आप को अरसा गुजर गया।। दीदार की खातिर भी मैं इधर उधर गया।। आदत मेरी खराब थी लोगों की नजर में। करके लिहाज आप का काफी सुधर…

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हमारी सोंच

आते हैं चले जाते हैं,  हम तो सिर्फ सोंचते रह जाते हैं किस कदर हम सोंचे किस रिस्ते को, यहाँ तो हर रिस्ते बिक जाते हैं दुनियाँ का अजब दस्तूर है, हर एक…

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एक सीमान्त

नम्रता को उसके गायक पति शिबू भोला ने डेढ़ घंटे बाद फ़ोन करने की बात कही थी। बेचैनी में उसने जैसे डेढ़ घंटे के 5400 सेकण्ड्स पूरे होते ही शिबू को फ़ोन मिलाया।…

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केवल विषय ही नहीं, खेल भी है विज्ञान

केवल विषय नहीं, खेल भी है विज्ञान - आइवर यूशिएल हमारे परम्परागत समाज में बड़ों की हमेशा यही इच्छा रहती है कि उनकी अगली पीढ़ी उनसे आगे निकले तथा जीवन में धन व…

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