ऐ भोले पशु ( कविता)

इस इंसानों की दुनिया में तेरा कहाँ ठिकाना है , ठोकरें खाते हुए इधर -उधर जीवन तूने गुज़ारना है । खाने को फेंका हुआ अन्न ,खाद्य -पदार्थ जहर (प्लास्टिक ) के साथ ,…

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माँ की दुआ

तुम भी दर्द कब तक देते, मैं भी दर्द कब तक सेहती तुम भी उतने बुरे नहीं हो, मैं भी अब इतनी भली नहीं। जिसके साथ माँ की दुआ हो उसके साथ गलत नहीं हो सकता। माँ की दुआ उसका रक्षा कवच बनकर हर मुसीबत से उसकी रक्षा करता है। किसी काम से अमरोहा अकेले ही जाना था लेकिन माँ दुआएं, पापा का आशीर्वाद, मैम की शुभकामनायें और मेरे भगवान जी का साथ है किसी और सहारे की क्या ज़रूरत?

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हँस हँस कर दर्द भूलाता हूँ…

तुमने अभी कहां जाना है मुझको कितना पहचाना है ! रो रो कर प्यास जगाता हूँ हँस हँस कर दर्द भूलाता हूँ !! तितिक्षा जीवन देती है पीडा अंदर भर देती है !…

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