काश !तुम रूबरू होते … (ग़ज़ल )

By | 2017-12-29T17:58:07+00:00 December 29th, 2017|गीत-ग़ज़ल, प्रेम पत्र|

(मेरे अज़ीज़  फनकार के नाम प्रेम -पत्र )   ऐ मेरे हमदम ,हम राज़ ,काश तुम रूबरू होते ... [...]

सर्दी

By | 2017-12-18T08:21:24+00:00 December 18th, 2017|लघुकथा|

" कितने दिनों से बोल रही हूँ , सिग्नेचर के ब्लैंकेट लेने के लिए । मगर प्रकाश तो सुनते [...]

अँधेरा

By | 2017-12-01T11:10:56+00:00 December 1st, 2017|कविता|

मैं एक कवि हूँ मुझे अँधेरा पसंद है हालांकि पसंद नहीं है मैं इसे खुद चूना हूँ मगर ये [...]

क्षितिज के उस पार

By | 2018-01-01T22:28:34+00:00 October 26th, 2017|गीत-ग़ज़ल|

खुलती हैं जब भी आसमां में , समंदर की खिड़कियाँ . एकाकार हो एक  दूजे से , करता  हो [...]