शश ….प्रशासन सो रहा है.

चाहे जितनी बार कर लो आप कैंडल मार्च,
और लेकर हाथ में जलती हुई मोमबतियां

एक दर्द भरी रिश्ते

हमें इतना संसारवाले कमजोर
क्यों मानते हैं मैं और मेरी माँ
क्या कसूर जो मेरे जन्म के
उपरांत …

चलो आज हम यू सफर करते है! आखिरी वक्त किसी को याद करते है!!

भले ही दर्द दे गए हो तुम हमको!
याद करते है अब हर पल तुमको!!

ऐ दर्द तेरे बिना अब क्या जीना!

जिस घुट के बाद याद तू न आए उस शराब को क्या पीना!!
यु तो हम दर्द में जी लेते है!

माँ की दुआ

तुम भी दर्द कब तक देते, मैं भी दर्द कब तक सेहती
तुम भी उतने बुरे नहीं हो, मैं भी अब इतनी भली नहीं।

जिसके साथ माँ की दुआ हो उसके साथ गलत नहीं हो सकता। माँ की दुआ उसका रक्षा कवच बनकर हर मुसीबत से उसकी रक्षा करता है। किसी काम से अमरोहा अकेले ही जाना था लेकिन माँ दुआएं, पापा का आशीर्वाद, मैम की शुभकामनायें और मेरे भगवान जी का साथ है किसी और सहारे की क्या ज़रूरत?

तिरंगा और कवि (कविता )

  तिरंगा बोला कवि से ,ऐ मेरे दोस्त ! कुछ मेरा हाल -ऐ-दिल भी सुन ले . तेरे एहसासों में …

हँस हँस कर दर्द भूलाता हूँ…

तुमने अभी कहां जाना है मुझको कितना पहचाना है ! रो रो कर प्यास जगाता हूँ हँस हँस कर दर्द …

आँसू, ग़म, तन्हाई बाँटो

आँसू, ग़म, तन्हाई बाँटो दर्दों की पुरवाई बाँटो हक़ सियासत ने दिया है दु:ख की तुम शहनाई बाँटो पहले क़त्ले-आम …