नारी उत्पीड़न

आदमी आदमी पे कर रहा अत्याचार है|
कहीं लुट रही अस्मत अबला की तो कहीं सामूहिक बलात्कार है|

ये कैसी वेदना ये कैसी चीत्कार है|