माँ(एक कविता)

ये कविता एक माँ के प्रति श्रद्धांजलि है। इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक पे गर्भ धारण, बच्ची, तरुणी, युवती, माँ, सास, दादी के रूप में क्रमिक विकास और फिर देहांत और देहोपरांत तक दिखाई गई है।

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गजब के गोरखा

हिंदुस्तान गजब की धरती,अजब है इसकी शान। वीरों से खाली नहीं होती, योद्धाओं की खान।। गुरंग, राय, मागर, लिम्बू, योद्धा सुनवार गोरखाली। कायरता से मरना अच्छा, गुरु गोरख, माता काली। रग रग में…

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हे मानव तुम जैसा नहीं हूँ मैं

हे मानव में तुम्हारे जैसा नहीं हूँ दो हाथ,दो पैर,आँख,व दिल वाला फिर भी संवेदनाओं को समझता हूँ,महसूस करता हूँ, माना पैसै नहीं कमाता न उगाता पर धन,सम्पत्ति,संपदा से महत्वपूर्ण धरती को संवाँरता…

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धरती माँ हमारी है

। । ओ३म् । । * _आज सत्ता के सूत्र जिन हाथों में हैं, उनकी सभी बातों अथवा कामों से पूर्णतया सहमत न होते हुए भी हमारी चाहत यह है कि कम-से-कम पन्द्रह…

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बाबा दी पाठशाला

* पाकिस्तान के पेशावर में विश्वविद्यालय पर हुए आतंकी हमले पर लिखी गई पंजाबी कविता :- * * * बाशा दी पाठशाला * * * अल्ला पै गई कालजे ठंड तेरे साडे रंगले…

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प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ

प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ =================== सदा बुलंदी पर परचम लहराये भारत का हो नतमस्तक दुनिया सारी गुण गान गाये भारत का जन गण मन अधिनायक का एक नाद माँगता हूँ ... मैं प्यारा…

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