पहाड़ का अस्तित्व- ( पहाड़ की नारी)

नारी के बिना पहाड़ अधूरा – या यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि पहाड़ का अस्तित्व ही नारी के …

गोलगप्पा अर्थात पानी पूरी अर्थात पुचका

कोई खावे सौंठ के साथ कुछ चटनी के लेवें,
दौना भर कै पानी पियें फिर सूखी पापड़ी लेवें

नारी नहीं अबला और बेचारी

नारी क्या लिखू मे तुझपे क्या बयान करू जज़्बात कहे तुझे कोई अबला और बेचारी नहीं रही तू अब वह …

बगावत बेचारा पुरुष

क्यों नहीं सोच पाती लड़कियां सिर्फ अपने बारे में क्यों सुख ढूंढती हैं वो पुरुष की अधीनता में क्यों चाहिए …