हिंदी का महत्व

भूल रहे हैं सब हिंदी के महत्व को, भारत देश के अस्तित्व को|
कितनी घोर निराशा है, अपना ली किसी गैर की भाषा है|
हिन्द राष्ट्र की जननी को,सूरदास की कथनी को|
मीरा की अभिलाषा को,अपनी प्यारी मातृभाषा को|

आत्म विश्वास

अटल,अमूल्य खड़ा जो मानव हृदय स्थली में निर्भय सा होकर शक्ति रूप में प्रज्वलित होकर   गहन अंधकार को भेदता …

निराशामयी मंज़र में अपनी ही आस्था पर सवाल

कितना बेबस सा हो जाता है उस वक़्त इंसान जब वो चाहता कुछ और हा मिलता कुछ और है मांगता …