मैं नदी होती

गर मैं एक नदी होती सागर में गिर जाती इसके पानी में मिल जाती इसके रंग में घुल जाती इसकी गहराई में झांक आती इसकी लहरों संग बह सागर के उस पार क्या…

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गाँव की बेहतर होती जीवनशैली

आजकल के गाँव पहले जैसे नहीं रहे हैं। उनमें भी शहरीकरण जैसा परिवर्तन हो रहा है। भारत के ज़्यादातर गाँवों में बिजली,पानी,इंटरनेट आदि सभी सुविधाएँ पहुँच गई हैं क्योंकि शिक्षा का स्तर निरंतर…

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एक जगह है दुगड्डा

मैं बहुत दिनों से पापा से ज़िद कर रही थी -" पापा कहीं घूमाने ले जाओ,कहीं लेकर नहीं जाते। सारी छुट्टियां ऐसे ही ख़त्म हो जाती हैं। " पापा ने कहा -"ठीक है…

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रिमझिम रिमझिम

रिमझिम रिमझिम बरसे पानी! हम हो सारा पानी मे सारा बोर! कैसे कहे बदलिया कछो कहूँ मैं! कभी फुहार कभी मनुवार बना है! फीस-फीस की झड़ियाँ लगी हुई है! झूम-झूम की झड़ियाँ लगी…

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ए मनुष्य

परछाई है हम ए मनुष्य तेरी तकदीर है तेरी धड़कने की ताबीज है ए मनुष्य तेरी साँसें की रूह है ए मनुष्य मेरे बिना तेरा जीवन बेकार है ए मनुष्य मेरे बिना तू…

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निम्मी

वह पंजों को हाथ की तरह फैलाकर बीच में अपना काला चितकबरा थूघुन रुखकर नींद की मुद्रा में लेटी थी, लेकिन वह सो नही रही थी, सोने की मुद्रा में आराम फरमा रही थी,…

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होली

होली कहने को तो होली है त्योहार मात्र पर है इसमें अपनेपन की छाया रंगों की धूम इसी में है भरमार इसी में पकवानों की न कोई बूढा न कोई बच्चा है न…

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आली री आली

कहीं मैं हूँ कहीं मेरा दिल है आकाश में उडूं यही मेरा मन है सुनहरी सी किरणें फैली जहां में सुर्यप्रभा मुझसे मिलने को तरसे आली री आली करूं तुझसे बतियां कूदती नदियां…

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