वृद्ध- आश्रम (पिता का उपहास)

उन्हे बस गोद में तो बिठाया था, झुका नही दुनिया के सामने पर पर उन्होने घुटने टेक घोडा बनवाया था, रोज ले जाता साथ उन्हे बाजार पैदल जो चलना सिखाया था, हर जिद…

Continue Reading वृद्ध- आश्रम (पिता का उपहास)

पिता की आस

कल तक जिनकी उँगली थामे चलना सीखा करती थी कल तक जिनके बाहों में मैं झूला झूला करती थी गुजरते उम्र और बढंते जिम्मेदारी ने उन कंधो को आज झुका दिया है जीवन…

Continue Reading पिता की आस

दीवार पर टंगी पिता की तस्वीर

आज पिता को गुजरे पूरा एक महीना हो चुका है।चलो सब  कार्य  अच्छी तरह से  निपट चुका है। अब मैं भी, पत्नी को साथ लेकर, कहीं  तीर्थाटन के लिए जाने की सोच रहा…

Continue Reading दीवार पर टंगी पिता की तस्वीर

चला गया परदेस हमारा लाल

चला गया है परदेश हमारा लाल पूँछ लेता है फोन पर कभी कभी हमारा हाल चाल   बेटा--- बहुत बिजी हूँ माँ टाइम नहीं मिलता कब आऊँगा वहाँ मुझे भी नहीं पता कैसी…

Continue Reading चला गया परदेस हमारा लाल