शश ….प्रशासन सो रहा है.

चाहे जितनी बार कर लो आप कैंडल मार्च,
और लेकर हाथ में जलती हुई मोमबतियां

नारी -सुरक्षा व् सम्मान : एक अनसुलझा प्रश्न (कविता)

क्या  नारी  कहीं सुरक्षित है ? अपने घर , या  घर के बाहर ! पड़ोसियों  के घर ? करीबी या …

तुम क्यों गए परदेस ?

तुम क्यों  गए परदेस ? वतन से इतनी दूर जहाँ, पहुँच सके ना कोई चिठ्ठी ,ना सन्देश. चलो ! मिल …

क्या साल पिछला दे गया

कुछ देर मैं पथ पर ठहर, अपने दृगों को फेरकर, लेखा लगा लूँ काल का जब साल आने को नया! …

काश !तुम रूबरू होते … (ग़ज़ल )

(मेरे अज़ीज़  फनकार के नाम प्रेम -पत्र )   ऐ मेरे हमदम ,हम राज़ ,काश तुम रूबरू होते … यूँ …