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नारी -सुरक्षा व् सम्मान : एक अनसुलझा प्रश्न (कविता)

By | 2018-04-17T18:31:36+00:00 April 17th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |

क्या  नारी  कहीं सुरक्षित है ? अपने घर , या  घर के बाहर ! पड़ोसियों  के घर ? करीबी [...]

काश !तुम रूबरू होते … (ग़ज़ल )

By | 2018-01-20T17:04:18+00:00 December 29th, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल, प्रेम पत्र|Tags: , , , |

(मेरे अज़ीज़  फनकार के नाम प्रेम -पत्र )   ऐ मेरे हमदम ,हम राज़ ,काश तुम रूबरू होते ... [...]