पानी

मैं पानी हूँ सबकी प्यास बुझाता हूँ अपने रक्त की एक एक बूंद से सबको सींचता हूँ बंजर धरा की एक एक दरार को तरता जाता हूँ मुझे एक अनमोल खजाने की तरह…

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एक अजीब दास्ताँ

एक अजीब दास्तान इश्क़ की पढ़ी मैंने गलियां फूलों की छोड़, काँटों की राह चुनी मैंने सबकी प्यास बुझाती नदियां देखी नदियों की प्यास बुझाता समंदर देखा पर उसी समंदर को प्यार में…

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हँस हँस कर दर्द भूलाता हूँ…

तुमने अभी कहां जाना है मुझको कितना पहचाना है ! रो रो कर प्यास जगाता हूँ हँस हँस कर दर्द भूलाता हूँ !! तितिक्षा जीवन देती है पीडा अंदर भर देती है !…

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कैसे आऐ ऋतुराज

धुँध मूँद कर नभ की आँखें , उपहास करती है , शीत भीत अवरुद्ध रवि किरणें पृथा प्यास सहती है । विहग डाल से पृथक ,पात पर बरफ़ीली आघातें दुबकी कलियाँ कक्ष ग्रीवा…

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अन्यत्र

एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त तुझे तो होगा नहीं कोई एहसास मरुथल की प्यास का देख देख सूरज की गर्मी और सूखते तरु तालाब का पपड़ियाँ जम गयी धरा के वक्ष पर…

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