ऐ भोले पशु ( कविता)

इस इंसानों की दुनिया में तेरा कहाँ ठिकाना है , ठोकरें खाते हुए इधर -उधर जीवन तूने गुज़ारना है । खाने को फेंका हुआ अन्न ,खाद्य -पदार्थ जहर (प्लास्टिक ) के साथ ,…

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