यूकेलिप्टस, कौवे और मैं

हर रात जैसे तैसे करवटें ले लेकर गुजरती। हर रात सुबह का इंतजार, हर सुबह जेठ की भरी दुपहरी का इंतजार, हर दोपहर शाम होने का इंतजार, हर शाम रात होने का इंतजार…

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