वेलेंटाइन डे (प्रेम दिवस)

“रोम” के इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाये तो हमें यह ज्ञात होता है की तीसरी शताब्दी में एक राजा हुआ करता था

जन्मोत्सव (एक उपहार)

तू मुस्कुराये यूँ बार बार
कितनी भोली है तू लगे प्यारी है तू
बनके प्रेम बदरिया जो तू सावन सी है बरसे

प्यार की हार

घर से निकलने के वक्त पिता से अपने मन की बात बताने की हिम्मत कर,निखिल पिता के कमरे में तो गया। पर,आमना-सामना होते ही सारी हिम्मत खोकर आशीर्वाद लेकर रवाना हो गया