बड़ता जुल्म मेरे हिंदुस्तान में

गंगा जामजम का पानी सब हो रहा क्यों बेकार ये,
किसको अपना समजू में किसका अब दीदार करू,

वेलेंटाइन डे (प्रेम दिवस)

“रोम” के इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाये तो हमें यह ज्ञात होता है की तीसरी शताब्दी में एक राजा हुआ करता था

जन्मोत्सव (एक उपहार)

तू मुस्कुराये यूँ बार बार
कितनी भोली है तू लगे प्यारी है तू
बनके प्रेम बदरिया जो तू सावन सी है बरसे