वो भी क्या मुलाकात थी

वो भी क्या मुलाकात थी वो खोए रहे खुद में मैं भी बस चुपचाप थी मुददतों बात की मुलाकात थी पहली और शायद आखिरी मुलाकात थी जब वो मेरे इतने नजदीक था न…

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प्रेम

यह प्रेम का पल है अनमोल है एक गहरा राज जो छिपा था दिल के भीतर उजागर भी है यह दृश्य जो दिख रहा है कुछ पलों में मिट जायेगा प्रेम जो होगा…

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अहसास

इस दुनिया से जाने वालों हो सके तो वापिस लौट आओ मैं अतृप्त हो गयी हूँ तुम्हारी आत्मीयता से भरी मीठी रस की फुहार सी बातों के अभाव में अखरने लगे हैं मुझे…

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