तिरंगा और कवि (कविता )

  तिरंगा बोला कवि से ,ऐ मेरे दोस्त ! कुछ मेरा हाल -ऐ-दिल भी सुन ले . तेरे एहसासों में दर्द है सारी कुदरत का, अब ज़रा मेरे दर्द का भी एहसास कर…

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सबका एक विधाता…

सबका एक विधाता... कौन किसी को क्या देता है नही कोई जहां में दाता | इंसा बड़ा नही कोई इतना सब का एक ही विधाता || किया नव्य किर्ति भी कोई या कि…

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बचपन की स्वछंदता (कविता)

बचपन के हाथ में है अब समय का चक्र . अपने आने वाले कल की फिर क्यों हो फ़िक्र . जिए जीवन गर हर इंसान यूँ ही बचपन सा , उतार कर बोझ…

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चलो! फिर से नन्हें बन जाये…

चलो ! फिर से नन्हें बन जाये , अपने बचपन को फिर दोहराएँ . गुज़रते वक़्त की गली में छोड़ा जिसे , उन यादों को  फिर से लौटा आयें . क्या सुख पा…

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एक था बचपन

एक  था  बचपन ,एक था  बचपन , भोला सा ,प्यारा  सा  ,नन्हा सा बचपन . क्यों  हैवानियत का ग्रास बना  बचपन ?   वोह  नटखटपन ,वोह शोखियाँ और  शरारतें , वोह अल्हड़पन ,…

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दूध के धुले लोग … (ग़ज़ल)

दूध  के धुले  लोग  कुछ हमसे  अलग होते हैं, हाँ  !  उनमें सुर -ख्वाब के पर  लगे होते हैं . रहते  हैं आसमां में ,ज़मीं पे कहाँ  रहते हैं , तकदीर  के यह…

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मृत्यु : एक शाश्वत सत्य य पहेली

               मृत्यु :  एक  शाश्वत सत्य य पहेली (कविता)                         नियति ही तो भेजती है तुझे और तू आ जाती है,  …

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यूँ खेलें होली ..

  होली  का उत्सव ज़रूर मनाये ,   ख़ुशी से   मेहरबां !  मगर  पर्यावरण का भी हुजुर! कुछ रखिये  ध्यान . प्राकृतिक रंगों का करें सदा  उपयोग , परस्पर रंग लगाने में. पानी…

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