गर्व से जीना सीख लिया

माँ की रोती हुई आवाज़
कर रही थी अपने पुत्र पर नाज़
पिता की आँखों में आंसू देखे
किंतु सर गर्व से ऊँचा उठा देखा

तिरंगा और कवि (कविता )

  तिरंगा बोला कवि से ,ऐ मेरे दोस्त ! कुछ मेरा हाल -ऐ-दिल भी सुन ले . तेरे एहसासों में …

बचपन की स्वछंदता (कविता)

बचपन के हाथ में है अब समय का चक्र . अपने आने वाले कल की फिर क्यों हो फ़िक्र . …

चलो! फिर से नन्हें बन जाये…

चलो ! फिर से नन्हें बन जाये , अपने बचपन को फिर दोहराएँ . गुज़रते वक़्त की गली में छोड़ा …

एक था बचपन

एक  था  बचपन ,एक था  बचपन , भोला सा ,प्यारा  सा  ,नन्हा सा बचपन . क्यों  हैवानियत का ग्रास बना  …

दूध के धुले लोग … (ग़ज़ल)

दूध  के धुले  लोग  कुछ हमसे  अलग होते हैं, हाँ  !  उनमें सुर -ख्वाब के पर  लगे होते हैं . …

मृत्यु : एक शाश्वत सत्य य पहेली

               मृत्यु :  एक  शाश्वत सत्य य पहेली (कविता)                       …

यूँ खेलें होली ..

  होली  का उत्सव ज़रूर मनाये ,   ख़ुशी से   मेहरबां !  मगर  पर्यावरण का भी हुजुर! कुछ रखिये  ध्यान …

प्रतिस्पर्धा

राहुल   अपनी  कक्षा   का   सबसे   मेघावी   व्  बुध्धिमान  छात्र   था. पढाई   के साथ-साथ   वह   विद्यालय   में होने वाली अन्य  गतिविधियों-खेल …

क्या पा लिया आज़ादी लेकर

क्या पा लिया आज़ादी लेकर , हम तो गुलामी में ही अच्छे  थे। बेकार बहाया शहीदों ने अपना खून, वोह …