प्रतिस्पर्धा

राहुल   अपनी  कक्षा   का   सबसे   मेघावी   व्  बुध्धिमान  छात्र   था. पढाई   के साथ-साथ   वह   विद्यालय   में होने वाली अन्य  गतिविधियों-खेल कूद व् सांस्कृतिक   कार्यक्रमों   में भी बढ़-चढ़  के भाग लेता था.  विद्यालय   के  …

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क्या पा लिया आज़ादी लेकर

क्या पा लिया आज़ादी लेकर , हम तो गुलामी में ही अच्छे  थे। बेकार बहाया शहीदों ने अपना खून, वोह भी तो किसी के  लाल थे। १०० वर्ष बाद मिली  जो खैरात में,…

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बचपन के दिन भी क्या दिन थे

बचपन के दिन भी क्या दिन थे! ना चिंता, ना कोई तनाव, ना तो ढेर सारी ख्वायिशें, ना ही बेशुमार अरमान। बस कुछ कहानी की पुस्तकें, एक प्यारी से सलोनी सी गुडिया, और…

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मुझे भारत कह कर पुकारो ना

मुझे  भारत  कह कर  पुकारो ना  मत  पुकारो  मुझे  तुम  India, मुझे  मेरे नाम  से पुकारो  न  , निहित  है जिसमें  प्यार व्  अपनापन , मुझे भारत  कह कर  पुकारो  ना.  तुमने कभी …

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नारी और धरती

हे नारी ! तुम हो धरती के सामान . सहनशील की पराकाष्ठ में , दया,करुणा ,ममता , त्याग , जितनी है तुम में ,नहीं उतनी पुरुष में . हे जननी ! तुम रोपती…

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काश !तुम रूबरू होते … (ग़ज़ल )

(मेरे अज़ीज़  फनकार के नाम प्रेम -पत्र )   ऐ मेरे हमदम ,हम राज़ ,काश तुम रूबरू होते ... यूँ  तो हो जाता है दीदार ,तुम्हारी तस्वीर से मगर , क्या   लुत्फ़…

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मुहोबत (ग़ज़ल )

                ज़माना   गुज़र गया तुम्हें याद करते ,                 तस्सवुर से तेरी तस्वीर  में रंग भरते.                तुम्हारी  तलाश में  हम भटका किय इस कदर,                जिंदगी में  हर मुसाफिर से…

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नयी उम्र की नयी फसल

नयी उम्र की नयी फसल , बहकी हुई भटकी हुई नस्ल . नस्ल तो है यह आदम जात , भूल गयी जो अपनी ही शक्ल . भौतिकता औ आधुनिकता ने , कुछ इस…

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कुछ शेर

१,    चिराग का पीछा करते अँधेरा आया हाथ, ऐसी मुक़द्दस तकदीर से और क्या कर सकते थे हम उम्मीद . २,   दिल तेरी यादों से महरूम न रहा , महसूस कर तेरी…

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क्षितिज के उस पार

खुलती हैं जब भी आसमां में , समंदर की खिड़कियाँ . एकाकार हो एक  दूजे से , करता  हो ज्यों कोई मीठी बत्तियां . क्षितिज का संगम न हो जैसे हो , दो …

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हा दुर्भाग्य ! (कविता)

हा ! दुर्भाग्य हा ! तू जिसको मिल जाये , उसे कभी ख़ुशी नहीं मिलती , चलता रहे चाहे जीवन भर , मगर मंजिल नहीं मिलती | अरमान होते हैं बेशुमार , मगर…

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बेवफा ज़माना ! (ग़ज़ल)

कभी तो सुबह होगी अपनी भी , चलते रहे ता उम्र हम फिर भी . लाखों तीर जुल्मी ज़माने के सहे , की ना हमने एक बार ''उफ़''  भी . अश्कों का सागर…

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विश्वास (कविता)

विश्वास पर ही यह , दुनिया है टिकी । और इसीलिए मेरी भी विश्वास भरी दृष्टि , तुझपर है  टिकी । माझी नदी /सागर में नाव छोड़ता है , किसी विश्वास पर। सिपाही …

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