फूलों से सीखो

फूलों से जरा सीखो अदा यूँ मुस्कुराने की कांटों से भी घिर के अपना दामन बचाने की। खिलते ही बिखर जाना बदा इनके नसीब में फितरत है इनकी फिर भी खिलते ही जानेकी।…

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मेरा अन्तर्द्वन्द …

""''''''' अंतर्द्वन्द """'''"" बड़ा उद्विग्न होता हूँ बहुत बेचैन रहता हूँ कतिपय कर्णहीनों को भला की बैन कहता हूँ ! मेरा संवादहीनों से न जाने क्यो नही बनती, मगर चुप्पी को भी तो…

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संघर्ष

संघर्ष से भरी ये दुनिया चक्रव्यूह में फंसती गयी ऐसा जाल बुना रब ने जीवन चक्र में जा पहुंची चलते चलते थक सी गयी अलसायी किनारे बैठ गयी आंचल में भर गयी रागिनी…

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हुल के फूल

हुल के फूल घिरे चारदिवारी के अंदर खिलते नहीं है वह तो तुम्हारे और मेरे हृदय में भी खिल सकता हैं जब तुम्हारे आँखो के सामने लोगों पर अत्याचार होता हैं तुम्हारे पत्नी…

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मेरी स्वप्न पर

मेरी फूटी छज्जा पुआल की झोपडी में खजूर पाटिया फटा गद्धा पर लेट कर तकते रहता था आसमान की ओर और सोरेन इपिल ,भुरका इपिल बूढ़ी परकोम को देख -देखकर डूब जाता था…

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