ज़िंदगी तू कहाँ खो गयी, मैं तुझको ढूँढा करता हूँ,

बचपन बीता और जवानी ढल गयी, जाने कैसी होड़ में,
अपनी मैं में मैं रहा, व्यस्त रहा पैसों की दौड़ में|

जीवन पल दो पल की कहानी

एक जीवन है जी भर कर जी लो
कुछ सुन लो मेरी कुछ तुम कह दो
अन्धकार का राज़ बहुत है
दीपक का उजियारा कर दो
बचपन की बातें है सुहानी
याद आती है वो हर शैतानी

बारिश और बचपन

बारिश, मिट्टी की खुशबू, कागज की कश्ती… बारिश में भीगने पर बच्चे को डांट रहे पिता को देख, अपने बचपन …