पढ़ी -लिखी बहु

बहु रोते हुए अपने कमरे में चली जाती है ,उसे सास -ससुर के अपशब्द बोलने का इतना दुःख नहीं ,जितना दुःख अपने पति की ख़ामोशी का है ,क्यों

चाहता मन – फिर बचपन

करूँ मैं नेकियाँ दिनभर, या फिर बहुत अच्छा हो जाऊँ अहिल्या की आस, मीरा की भक्ति सा सच्चा हो जाऊँ। …