बचपन की स्वछंदता (कविता)

बचपन के हाथ में है अब समय का चक्र . अपने आने वाले कल की फिर क्यों हो फ़िक्र . …

चलो! फिर से नन्हें बन जाये…

चलो ! फिर से नन्हें बन जाये , अपने बचपन को फिर दोहराएँ . गुज़रते वक़्त की गली में छोड़ा …

एक था बचपन

एक  था  बचपन ,एक था  बचपन , भोला सा ,प्यारा  सा  ,नन्हा सा बचपन . क्यों  हैवानियत का ग्रास बना  …

प्रतिस्पर्धा

राहुल   अपनी  कक्षा   का   सबसे   मेघावी   व्  बुध्धिमान  छात्र   था. पढाई   के साथ-साथ   वह   विद्यालय   में होने वाली अन्य  गतिविधियों-खेल …