किनारे किनारे

मैं तो यूं ही जरा घूमने निकली तो सागर की उठती गिरती, शोर मचाती लहरों का खेल देख पलभर को ठहर गई किनारे किनारे चल रही समुंदर के पार पहुँचने का न कोई…

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जुस्तजू

तू जो साथ मेरे मुझे एक सुहावने मौसम की नहीं आरजू न किसी घर की न मंजिल की बस तेरे दिल तक पहुँचते हर रास्ते की जुस्तजू। मीनल

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काबिल

अपनी मनपसंद गजल :- वो तो काबिल थे सही का शुमार कर लेते। मेरी गलती थी तो उसमें सुधार कर लेते।। अगर कोई न हो तेरा यहां सुनने वाला। तो ये बेहतर था…

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एक नन्हा दीपक

इन काली काली रातों में,एक नन्हा दीपक जलता है। मगर अफ़सोस वो बेजुबाँ,क्यों बिखरा बिखरा रहता है,क्यों उखड़ा उखड़ा रहता है। इन गम के तुफानो में,कंही महफूज पलता है। सांसे न रुक जाएँ…

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हमारी दुनिया

कभी तुम मेरे साथ कभी मै तुम्हारे साथ, चलो साथी चलते है एक नयी दुनिया में उस मोहब्बत भरी दुनिया में जहाँ फ़रिश्ते नही होते और ना ही शैतान, जहाँ जिन्दगी उसकी है…

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