शादी , शहर या गाँव में ?

आज पान सिंह जी को अपना गांव छोड़े हुए एक लंबा अरसा हो गया था , वह सहपरिवार शहर में ही आकर बस गए थे उन्होंने यही शहर में अपना मकान बना रखा…

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बिक रहा है

सायल की कलम से ~~~~ कहीं कोयला तो कहीं खदान बिक रहा है. गोल गुम्बद में हिंदुस्तान बिक रहा है.. यूँ तो कागज गल जाता है पानी की एक बूँद से. चंद कागज़…

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मकान

तरही गजल :- बेरहम तूफान हो गये। लोग बे मकान हो गये।। चीख औ पुकार मच गई। बहरे हुक्मरान हो गये।। दुर्गुणों की खान हो गये। जबसे वो महान हो गये।। बाजार के…

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