वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे

मधुगीति १८०२१२ ब वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे? निर्गुण की पहेली, अहसास की अठखेली; गुणों …

किलकि पुलकि प्रीति चहति

किलकि पुलकि प्रीति चहति, हर चम्पा कलिका; चेतन मन तानन भरि, राखति ना शंका ! सोचत ही सब पावत, थिरकन …