चन्द्रग्रहण

चाँद कहे धरा से थोड़ा सा तो खिसक ले, कर लूँ दीदार मैं भी अपने चमन का, अब कुछ घुटन सी होने लगी है मन पर, कहीं मैं होकर निढाल गिर ना जाऊँ…

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पतन

एकाएक उपजी इस इमरजेंसी में श्रीधर करे तो क्या करे। बीच बीच में राहुल से सम्पर्क साधने की कोशिश की जाती पर विफलता ही हाथ लगती।

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माँ

मेरे बेचैन मन की आवाज हो तुम मेरे जीवन संगीत का साज हो तुम मेरी हर सफलता का राज हो तुम रज़ा यही कि हर जनम में बस तू ही मिले, मेरे सफ़र…

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माँ(एक कविता)

ये कविता एक माँ के प्रति श्रद्धांजलि है। इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक पे गर्भ धारण, बच्ची, तरुणी, युवती, माँ, सास, दादी के रूप में क्रमिक विकास और फिर देहांत और देहोपरांत तक दिखाई गई है।

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तुमसे कितना प्यार है आज हमे मालुम हुआ 

डिअर मम्मी love you mummy कहना तो बहुत कुछ है आपसे जो कभी कहा नहीं। आपको हमेशा दुसरो के जीते जुए देखा है। सारी ज़िंदगी दुसरो की सेवा करते हुए आपने कभी अपने…

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