नारी सबला

०७.०५.२०१६ "नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे।" "नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे, लिखते हो तो शोषित जन के कातर हाहाकार लिखो रे, है नारी…

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मधुबाला

1 मैं मधुबाला मधुशाला की, मैं मधुशाला की मधुबाला! मैं मधु-विक्रेता को प्यारी, मधु के धट मुझ पर बलिहारी, प्यालों की मैं सुषमा सारी, मेरा रुख देखा करती है मधु-प्यासे नयनों की माला।…

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माँ मातेश्वरी

रस रक्त से एक पिंड बनाया नारायण सा रंग रूप बनाया प्राण पण से प्राण जगाया भाव भर कर भक्त बनाया पूरी शक्ति से सशक्त बनाया मानवता का सुर सुक्त पढाया तब जाकर…

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