मित्र हो तो ऐसा

दोस्त हो तो ऐसा मित्र बनाया नही जाता वों तो खुद बन जातें! मित्र वों है जो दिल और पवित्र व सचित्र हो! अच्छा मित्र कभी गलत राह नहीं दिखता है! अच्छा मित्र…

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शब्द

जब समक्षा मैंने इस ढाई अक्षर की गहराई को, तब जाना मैंने इस जीवन की सच्चाई को। शब्दों से ही रिस्ते हैं और शब्दों से ही मित्र यहाँ और दुश्मन भी कोई है…

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