झूठे मुखौटे (लघुकथा)

दूसरे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, “उसका तो मुझे नहीं पता, लेकिन तुम्हारे मुखौटे की हर रग और हर रंग को मैं बखूबी जानता हूँ।

आज क्या कह रहा रिसाल पता चल जाए

हामी भरते है हर एक बात में सहमते है ओ
उनके जेहन में क्या सवाल पता चल जाये

तेरे मेरे  अधरों  पर  हरदम  बस  यों  ही  मुस्कान  रहे ।

सूरत सुहानी  देख  तुम्हारी  भूल  गए  हम तो  रब  को । तेरा  चेहरा  याद  रहा  बस  भूल  गए  हम  तो …

तेरी खामोशी (अहसासों की झलक)

तेरी खामोशी (अहसासों की झलक) तेरी प्यासी निगाहों कि कसक यूँ झलके, के जैसे  शोख़ निगाहें बेसब्री से इंतेज़ार करे …