मेघ

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मैं स्वयं बन मेघ जाता

By | 2018-02-11T17:01:22+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता मैं स्वयं बन मेघ जाता! 1 हो धरणि चाहे शरद की चाँदनी में स्नान करती, [...]