फ़िर वह लौट ना सका

मुझे अपनी बाहों में खिलाने वाला मेरा हौसला बढ़ाने वाला सूरज की तरह तपना सिखाने वाला अपने कन्धों पर चढ़ाकर दुनिया दिखाने वाला अपनी बाँहों में आज मुझे क्यों ढूंढ रहा है। हर…

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मौत से ठन गई (अटल स्मृति)
shree atal bihari 4 hindilekhak.com

मौत से ठन गई (अटल स्मृति)

अटल स्मृति: श्रद्धांजलि  श्रंखला ठन गई! मौत से ठन गई!  जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,  रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी…

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अब मैं आता हूँ मात्र

अब मैं आता हूँ मात्र ! (मधुगीति १८०२११) अब मैं आता हूँ मात्र, अपनी विश्व वाटिका को झाँकने; अतीत में आयोजित रोपित कल्पित, भाव की डालियों की भंगिमा देखने ! उनके स्वरूपों की…

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