हावड़ा – मेदिनीपुर की लास्ट लोकल ….!!

कई तरह की सही - गलत धारणाएं हो सकती है। जिनमें एक धारणा यह भी है कि देर रात या मुंह अंधेरे महानगर से उपनगरों के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनें अमूमन खाली ही दौड़ती होंगी।

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एक साल एक सदी सा

ऑफिस की घड़ी में छह बजने को आये थे। इस वक़्त ऑफिस से ज्यादा वहाँ के रिसेप्शन पे हलचल होती थी, सब एक एक करके घर जो जाने लगे थे पर आज रिसेप्शन…

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पेरेंट्स, बच्चों को ना पकड़ाएं मोबाइल का झुनझुना

पैरेंट्स, अपने बच्चों के हाथ में मोबाइल का झुनझुना देना बंद करिए _____ डिजिटल लत का चस्का__संचार क्रांति ने हमारी दुनिया बदल कर रख दी है। मोबाइल जीवन की जरूरत बन चुका है।…

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मोबाइल

मोबाइल ने भी क्या कमाल कर दिया, एकल परिवार को जॉइंट में बदल दिया ! हम दो हमारे दो का नारा कभी बुलंद था आज भी हम दो हमारे दो का चलन हैं…

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