ग़ज़ल

जब मोहब्बत से भरे ख़त देखना भूल कर भी मत अदावत देखना साँस लेते लेते दम घुटने लगे इस क़दर भी क्या अज़ीयत देखना मसअला दुनिया का छेड़ो बाद में पहले अपने घर…

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दिल की लगी…

मोहब्बत का मातम मानाने चला हूँ दिल की लगी आज बुझाने चला हूँ तडपता है दिल ये तेरी याद बनकर i रोता है मजबूर औ बेकार बनकर ii वही राज में आज बताने…

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गर मुँह दिया है  तो जरूर सच्ची ज़ुबान देना 

जितना जी चाहे ,तुम खूब मेरा इम्तहान लेना ज़िंदगी, पहले तुम मुझे जीने का सामान देना मैं छोड़ सकूँ अपने निशाँ मंज़िल के सीने पे मेरी राहों में थोड़ी हँसी, थोड़ी मुस्कान देना न चुप…

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नफरत है आग, मोहब्बत है रोशनी

कोई राम पर लड़ रहा है कोई इस्लाम पर लड़ रहा है किसी को कीर्तन पसन्द नहीं कोई अज़ान पर लड़ रहा है बड़े-बड़े लोगों के पास ये ही छोटे-छोटे मुद्दे हैं कैसे…

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