मैं नदी होती

गर मैं एक नदी होती सागर में गिर जाती इसके पानी में मिल जाती इसके रंग में घुल जाती इसकी गहराई में झांक आती इसकी लहरों संग बह सागर के उस पार क्या…

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कैसा मौसम

यह कैसा मौसम है आसमान में न सूरज है न चाँद कायनात के रंगों को भी लगता है किसी गम ने खा लिया है आज तभी वो सारे सुंदर, सुनहरे, तीखे, भड़कीले रंग…

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इश्क़ के रंग

हाथों में लेकर गुलाल मैं ढूढ रहा उन नजरों को , जिससे आंखे मिलाकर रंग पाऊ उसके सफ़ेद से चेहरों को | . पर मिली नहीं वो कहीं बहुत ढूढा इस गली, उस…

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कितने रंग भरे है

होली में कितने रंग भरे है ये हमारी समझ से कितने परे है साल के बारह महीने बारह के बावन तब जाकर आता है यह मास बड़ा ही पावन फिर भी हम अपनी…

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रंग

माँ मेरे पास आयी और डांटने लगी यह क्या अभी तुम ऐसे ही बैठी हो आज तुम्हारी रिंग सेहरामनी और संगीत है उठो तैयार हो जाओ। चारो ओर खुशी का माहौल था कल…

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कविता

प्रेमरंग की होली शीत ऋतु की हुई विदाई। ग्रीष्म ऋतु में आई होली।। खिले टेसू के फूल प्यारे। केसरिया ये प्यारे -प्यारे।। परीक्षा भी नजदीक आई। करो जमकर तुम पढ़ाई।। दादा से पिचकारी…

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होली

रंग उड़े गुलाल उड़े प्रिय तुम्हारा प्यार उड़े मुरली की मधुर तान उड़े उड़ जाए मेरी चुन्दरिया पवन बिखरे रंग रंगीले मौसम में अजब बहार उठे रघुनाथ की सीता नाचे कृष्ण की राधा…

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होली का रंग

होली का रंग लाया उमंग , कहता है यारा चल मेरे संग। बँटती है भंग, बढ़ती हुड़दंग, गुलाल भरता अंगों पर रंग । गोपियाँ करती, ग्वालों को तंग, प्रेम में रंगता मन का…

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मैं बेटी हूँ

मैं बेटी हूँ ... ================== मैं बेटी हूँ आजाद परिंदे सी मुझ को उड़ने दो जीत जाऊंगी जग से मैं जग से मुझ को लड़ने दो। मैं बेटी हूँ... मत मारो माँ मुझे…

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गुब्बारे वाला

गुब्बारे ले लो गुब्बारे वाला नीले पीले हरे गुलाबी हर रंग के गुब्बारे लाया चिया, भूमि, निखिल, कन्हैया आओ बच्चों घर से निकलो शोर मचाती, चिया, निकली मां मुझको गुब्बारे ले दो लाल…

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व्याकुलता

औचित्य क्या मेरे जीवन का नही समझ में आया है इतराते फिरते चकाचौंध में पाश्चात्य रंग ने भरमाया है । मन में व्याकुलता है, कैसे धीर धरू रुदन कर रही धरती माँ ,कैसे…

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पेड़ -लताओं के हुल

अब जंगल -पर्वतों में पलाश फूल खिला है लाल अति सुन्दर जैसे कोई हुल का आग जलाया है देश के हर कोने में जंगल -पर्वतों के पेड़ -लताएं अब खड़े हुए हैं सर…

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