चश्मे का नंबर बढ़ा

चश्मे का नंबर बढ़ा !! ---------------------------------- बिन चश्मे का बचपन था हर कोई दोस्त हर कहीं अपनापन था। ज्यों-ज्यों चश्मे का नंबर बढ़ा । त्यों-त्यों सच्चाई से पर्दा हटा । राजनीति का बुखार…

Continue Reading

मैं जिंदा हूँ

मैं जिंदा हूँ...क्यूंकि मेरी सांसें चल रहीं हैं और मेरा दिल धड़क रहा है! पर आजकल ज़माना बदल गया है और जिंदा रहने का पैमाना साँसें और धडकन जैसी जीवित चीज़ों से हटकर…

Continue Reading
Close Menu