राजनीतिक व्यंग

कुछ लोगो को कहा गया है || जा करके अब आराम करो || उम्र बढ़ी है चढ़ गया बुढ़ापा || अब तो दादा विश्राम करो || छोड़ो झंझट कुर्सी का अब || हम…

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खिचड़ी तेरे रूप अनेक

पसंद अनुसार सब्जियां, मसाले, मूंगफली, दालें, घी का प्रयोग कर स्वादिष्ट बनता जा सकता है। इस तरह की खिचड़ी को यू.पी. में

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चश्मे का नंबर बढ़ा

चश्मे का नंबर बढ़ा !! ---------------------------------- बिन चश्मे का बचपन था हर कोई दोस्त हर कहीं अपनापन था। ज्यों-ज्यों चश्मे का नंबर बढ़ा । त्यों-त्यों सच्चाई से पर्दा हटा । राजनीति का बुखार…

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मैं जिंदा हूँ

मैं जिंदा हूँ...क्यूंकि मेरी सांसें चल रहीं हैं और मेरा दिल धड़क रहा है! पर आजकल ज़माना बदल गया है और जिंदा रहने का पैमाना साँसें और धडकन जैसी जीवित चीज़ों से हटकर…

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