पानी

मैं पानी हूँ सबकी प्यास बुझाता हूँ अपने रक्त की एक एक बूंद से सबको सींचता हूँ बंजर धरा की एक एक दरार को तरता जाता हूँ मुझे एक अनमोल खजाने की तरह…

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