दो वक़्त

दो वक़्त की दास्तान दो वक़्त का फ़रमान दो वक़्त की ज़िंदगी दो वक़्त का सफ़र दो वक़्त की लम्हा दो वक़्त के रास्ते दो वक़्त का ठहरना दो वक़्त का ठिकाना दो…

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शोर

सारा वक्त परेशां से थे हम, ना जाने क्या शोर था ; बहुत कुछ टूटने की आवाजें थी, दिमाग सै सोचा जो इक पल, तूफां था जो दिल में उठा था| अंजना योगी

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आइना

गिरहबन्द गजल प्रस्तुत है :- कुछ हवा का भी रुख जानना चाहिए।। रूबरू वक्त का आइना चाहिए। सामने से अगर वो दिखाई न दें। खिड़कियों से हमें झांकना चाहिए।। जिन्दगी में अगर कुछ…

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जीवन की आपाधापी में

जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा…

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जिसने तुझे राेका हुआ

वशीभूत तू मन के तकी जिसने तुझे राेका हुआ देख तेरे साथ अब कितना बडा़ धाेखा हुआ ।। खुशनसीबी क्या तेरी तेरे राेम मे बैठा हुआ पर देख प्यारे गाैर से कैसा तूने…

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