एक प्यार ऐसा भी

दोपहर के लंच का समय हो रहा था , रजनी ने अपने P. A से पूछा क्या कोई और भी है इंटरव्यू देने के लिए ?
P. A -yes maim one candidate more
Rajni – ok उन्हें भेजो

दीवारें बोल उठेंगी

ऐसा भी कहीं होता है! कुछ भी, विज्ञापन दिखा देते हैं। फिर सोचा एक बार ट्राई करने में क्या जाता है, मैंने दीवार की तरफ मुंह किया और पूछा क्या तुम बोलना जानती हो? उधर से आवाज आई, क्या आप सुनना पसंद करोगे? अरे वाह! यह तो चमत्कार हो गया। मैंने तो सुना था दीवारों के कान होते हैं, लेकिन इसकी तो जुबां भी है….

सुनो बहू, क्या लाई हो

शादी को अभी कुछ ही वक़्त हुआ है……। मायके से ससुराल वापसी पर….,  सासू मां और  संग सहेलियां पूछने लगती …

चिट्ठी का फटा कोना

ससुर जी ज़ोर से हंस कर बोले अरे भागवान तुम्हे पढ़ना नहीं आता तो कम से कम पढवा ही लेतीं बहू से ।और बहू तुमने भी पढ्ने का कष्ट नहीं किया ? “

अभागिन

वहां जाकर पता चला मेरी सहेली जो मुझे अति प्रिय थी उसके पति अचानक सड़क दुर्घटना में चल बसे, मैं दुखद भरी घटना सुनकर सम्भल नहीं पा रही थी उससे मिलने जाना था।