तवायफ़

महफ़िल सजा कर महफ़िल की शाम रंगीन कर गयी फिर एक तवायफ को दुनिया बदनाम कर गयी खिली चेहरे पे उसके जो बेबाक सी हँसी फिर दिल ऐ दर्द मुस्कान होंठो की कर…

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एक था बचपन

शामें तो बचपन में हुआ करती थी! एक अरसा हुआ,अब वो शाम नहीं होती। जिसका इंतजार रहता था,खेलने के लिए। फिर थोड़ा और बड़े हुए! शाम का इंतजार होता था,दोस्तों को अपने सपने…

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