जिन्दगी

ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दिया बाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दिया उम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गई नरम हाथों को सलाखों सा कड़ा कर…

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कुदरती रज़ा

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी हैं कैसे कोई बच…

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ग़ज़ल

फ़ोन पर ज़ाहिर फ़साने हो गए ख़त पढ़े कितने ज़माने हो गए ऐब इक पाला फ़क़त हमने मियां चार सू अपने ठिकाने हो गए बेटियां कोठों की ज़ीनत बन गईं किस क़दर ऊँचे…

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मोहब्बत मेरी।

मोहब्बत मेरी। ए मोहब्बत मेरी तुम , लगती हो जैसे ढलती शाम, उगता रवि,चलती पवन कवि की कविता,शायर की शायरी गुलज़ार की गजल,प्रेम की कहानी पक्षियों का कलरव, कोयल की राग पर अब…

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