अभिनंदन की शौर्य गाथा

घर लौट के कैसा लगता है, पूछो उस वीर जवान से,  शेरों की भांति निडर खड़ा रहा, नहीं धमका पाक़िस्तान से| गैर मुल्क में घुस पड़ा था, अपना सीना तान के, पुर्जे पुर्जे…

Continue Reading
Close Menu