आपसे आज दूर रहना….

लम्हा-लम्हा मैंने बिताया उनके एक-एक क्षण कैसे कहें
जिंदा कैसे उनके बेगैर मैं इस जहां में जीते जा रहे हैं

स्वप्न -एक गीत

हे स्वप्न तुम्ही मेरे संसार जीवन के अनुपम उपहार होता प्रतिपल आकुल अन्तर जीवन तो है सत्य भयंकर प्राणों की …

मदन पीर

प्रेम बसा लो नयनों में चंचलता चित्त के द्वार धरो हे मृगनयनी हे मधुबाले मेरा प्रणय – निवेदन स्वीकार करो …