चलो! फिर से नन्हें बन जाये…

चलो ! फिर से नन्हें बन जाये , अपने बचपन को फिर दोहराएँ . गुज़रते वक़्त की गली में छोड़ा …

वर्तमान समाज और मां

सहसा एक रात सपनों में मैंने, अतीत के पन्नों में झांककर देखा। सपनों में मैंने जो देखा, वो था बड़ा …

संस्कार : नए-पुराने

कहते हैं हमारे हिन्दुस्तानी समाज में जन्म से लेकर मरण १६ संस्कारों से गुजरना पड़ता है, जिसमे सोलहवाँ संस्कार मृत्यु-उपरान्त …