हिंदी दिवस पर

मैं हिंदी, आज नगर भ्रमण पर निकली हूं। आप अपनी मातृभाषा में जितना अच्छा सोच सकते हैं, उतना दूसरी भाषा में नहीं।

निश्छल प्रेम

स्वामी विवेकानंद ने कहा है—“संसार में हमेशा दाता का आसन ग्रहण करो, सर्वस्व दे दो पर बदले में कुछ ना चाहो। प्रेम दो, सहायता दो, सेवा दो। इनमें से जो कुछ भी तुम्हारे पास देने के लिए है वह दे डालो। किन्तु सावधान रहो उनके बदले में कुछ लेने की इच्छा कभी ना करो। अपनी हार्दिक दानशीलता के कारण ही हम देते चलें, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार ईश्वर हमें देता है।”