निश्छल प्रेम

स्वामी विवेकानंद ने कहा है---"संसार में हमेशा दाता का आसन ग्रहण करो, सर्वस्व दे दो पर बदले में कुछ ना चाहो। प्रेम दो, सहायता दो, सेवा दो। इनमें से जो कुछ भी तुम्हारे पास देने के लिए है वह दे डालो। किन्तु सावधान रहो उनके बदले में कुछ लेने की इच्छा कभी ना करो। अपनी हार्दिक दानशीलता के कारण ही हम देते चलें, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार ईश्वर हमें देता है।"

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देहरी

बड़े शहरों में फ्लैट संस्कृति!!!! अब घरों में देहरी नहीं होती!! जिसे देख समझाया था, कभी देहरी पार करने का मतलब, अब घुटनों चलते बच्चे भी, पार कर, हो जाते हैं घर से…

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वटवृक्ष

आज याद आती है- पिताजी की वो बातें थकान और तनावग्रस्त आकर लंबी सांसे ले बिस्तर पर ऐसे बैठना जैसे- किसी परिंदे को मिला हो अपना बिछड़ा परिवार सुकून भरी शाम की चाय…

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सुन्दरता

सुन्दर हो हर मन का सपना जीवन मे हर शख्स हो अपना बैशुमार वैभव हो चाहे गुण सम्पन्न हुदय हो अपना द्वेष-भाव न ईर्ष्या हो मन मे प्रेम-प्यार हो सब जीवन मे रहे…

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