मैं हूँ समाज!

मैं हूँ समाज! मैं समाज की नाम और प्रतिष्ठा हूँ मैं एक ऐसा समाज का निर्माण करता हूँ मैं ना किसी को भोजन न कपड़े लत्ते भेंट करता हूँ! मगर मेरे इस नाम…

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अच्छी औरतें

      अच्छी औरतें खींचे ख़ाकों में, बसर करने वाली कुछ औरतें, बहुत अच्छी लगती हैं। पूंजी, तुम्हारी ही जेब में रखें जो कमाई, तुम्हारे ही हाथ रखें जो हर खर्च पूछ…

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प्रेमचंद ओ प्रेमचंद…

प्रेमचंद ओ प्रेमचंद ओ प्रेमचंद ओ प्रेमचंद... प्रेम चंद सच सच बतलाना 3 दो भाई के बटवारे मे व्यथा द्वंद्व के अंधियारे मे लाभ हानि की अग्नि मे जब सब आपस मे धधक…

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कैसे लक्ष्य सफल होगा (प्रेरणा)…

फूलों से आकर्षित करना बिन बोले बिन समझाये ! खुश्बू बिना किसी शर्त ही हम तक अपनी पहुँचाए !! इन फूलों को तोड॒ मनुज निज स्वार्थ हेतु ले जाता ! और कही देवालय…

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एक पत्र पेरेंट्स के लिए

हैलो पेरेंट्स ... बच्चों की  परवरिश को लेकर मुझे  कुछ  कहना है। आपके बच्चों को आप जैसा बनाते हैं, वह कुछ वर्षों की कड़ी मेहनत का  परिणाम है। यह एक तरह की  जीवनबीमा…

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वक़्त है अभी भी

वो तोड़ रहे है हमारे होंसलों को अभी टूटे तो बिखर जाएंगे अभी तो वक़्त कदम उठाने का है अगर रुके तो फिसल जाएंगे मौन होना कोई समाधान नहीं है सवाल और भी…

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चुगली का बाज़ार गर्म है … (हास्य-व्यंग्य कविता)

चुगली का बाज़ार  गर्म है , समाज में  लोगों के बीच , राजनीति में नेताओं के बीच , इसका बड़ा प्रचलन है. है यह अनूठा कर्म , बड़ा ही  रोचक जगत-प्रसिद्ध और, रोग…

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दोहे

इस कल युग के काल में, मचा हुआ हुडदंग। डर-डर के जीते फिरें, सूख चुके सब अंग।।१ नर डर-डर के जूझता, लेकर स्वयं उपाधि। बेकारी ऐसी हो गई,  जैसे बनी समाधि।।२ नर धीरे-धीरे…

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अध्यापक बदनाम है

समाज में सब अच्छे,अध्यापक बदनाम है। बस हो यां रिक्शा हर जगह सुने कि मास्टरों की तो खूब शान है। समाज में सब अच्छे अध्यापक बदनाम है । समय पर आना,समय पर जाना…

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