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चुगली का बाज़ार गर्म है … (हास्य-व्यंग्य कविता)

By | 2018-04-14T12:11:01+00:00 April 14th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |

चुगली का बाज़ार  गर्म है , समाज में  लोगों के बीच , राजनीति में नेताओं के बीच , इसका [...]

संस्कार : नए-पुराने

By | 2018-02-17T16:21:52+00:00 February 17th, 2018|Categories: व्यंग्य|Tags: , , |

कहते हैं हमारे हिन्दुस्तानी समाज में जन्म से लेकर मरण १६ संस्कारों से गुजरना पड़ता है, जिसमे सोलहवाँ संस्कार [...]

हे पतिदेव

By | 2017-12-04T16:54:51+00:00 December 4th, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |

मेरे निर्णय में बस मेरी मंजूरी हो इससे तेरा पुरुषत्व हिल गया ये भी नहीं जरुरी हो पुरुष समाज बनाकर तुम नारी के आगे खडे़ हो गये जहाँ खड़े हो उस धरती को ही रौंदों ऐसी भी न कमजोरी हो घूँघट में रहती है नारी तो कहते हो क्या कर पाती है एक कदम इच्छा का अपनी हो तो तेरी अहम की दुनिया हिल जाती है सौदा जनमों का करके तेरी दुनिया में जो आई हूँ खुल कर सांस तो ले पाऊँ मै ऐसी तो साझेदारी हो बनकर फूल चमेली का खुशबू मैं तुमको देती आऊँ पर खुशबू के लिए ही तुम मुझको तोडो़ ऐसी भी न तेरी हकदारी हो।

किसका भारत महान?

By | 2018-04-07T11:45:03+00:00 September 9th, 2017|Categories: कहानी|Tags: , , |

पैंतालीस वर्षों से दुनियाभर में समाजसेवा और निष्पक्ष खोजी पत्रकारिता कर रहे कनाडा के चार्ली हैस को नोबेल शांति [...]