किनारे किनारे

मैं तो यूं ही जरा घूमने निकली तो सागर की उठती गिरती, शोर मचाती लहरों का खेल देख पलभर को ठहर गई किनारे किनारे चल रही समुंदर के पार पहुँचने का न कोई…

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मैं नदी होती

गर मैं एक नदी होती सागर में गिर जाती इसके पानी में मिल जाती इसके रंग में घुल जाती इसकी गहराई में झांक आती इसकी लहरों संग बह सागर के उस पार क्या…

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नासाज दिल

दिल आज नासाज हे, नासमझ कुछ मिजाज हे, दर्द इश्क का नही फिर भी उदास हे, ख्वाईशो की लंबी फेहरिस्त के बोझ मे, गुमसुम हे, अंजान हे, परेशान हे.. करना चाहता हे बाते…

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