साथी

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साथी, नया वर्ष आया है

By | 2018-02-11T17:01:20+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

वर्ष पुराना, ले, अब जाता, कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता दे जी भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख [...]

साथी, सब कुछ सहना होगा!

By | 2018-02-11T17:01:21+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधों में रहना [...]