क्या लिखूं तेरे बारे , जितना लिखूं कम ही कम है

फुलवारी में खिले फूलों सी
तेरी खुशबू मेरी साँसों में घुल रही है
समुन्दर की लहर सी￰ तू भी मेरे
इक यादों को…

याद जब तेरी आती है तो आँखे नम हो जाती है

याद जब तेरी आती है तो आँखे नम हो जाती है ढूढती है हर तरफ मगर दीदार नहीं कर पाती …

नींव के पत्थर

(जिन भव्य भवनों, ऊंची अट्टालिकाओं, महलों – राजप्रसादों के शिखर – कंगूरे आकाश से बातें कर रहे हैं, उन्हीं की …

साजन आए, सावन आया

अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं, साजन आए, सावन आया। धरती की जलती साँसों ने मेरी साँसों में ताप भरा, सरसी …

मित्रता

थोड़े गिले हों,थोड़े शिकवे हों,थोड़ी ज़िद हो, प्यार होना चाहिए, पतझड़ हो,सावन हो,बसन्त हो ज़िन्दगी में, दोस्ती में सदाबहार होनी …