टिक-टिक-टिक, चटर पटर

आज सूरज कितना निस्तेज हो रहा है, दिन के एक बजे जब उसे अपने परम तापमान पर होना चाहिए, बिंदी जैसा चमक रहा है आसमान के चेहरे पर, और ये दुष्ट कोहरा जैसे सूरज को ज़ंग में हराने को अमादा हो जैसे कह रहा हो -"निकल कर दिखा, देख मैं धुआं धुआं सा कोहरा तेरा तेरा रास्ते रोके खड़ा हुँ|

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तुम हो तो, जिंदगी है

तुम हो तो, जिंदगी है तुम से ही, बन्दगी है तुमसे क्या है, रूठना ये तो इक, दिल्लगी है क्या कहा, तुम्हें मत सोचूँ मेरी तो ये, तिश्नगी है इश्क़ करके कैसे भूलूँ…

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