मधुशाला

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा …

साथी, नया वर्ष आया है

वर्ष पुराना, ले, अब जाता, कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता दे जी भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख पाया …

साथी, सब कुछ सहना होगा!

मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधों में रहना होगा! …

संवेदना

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी ? क्या करूँ ? मैं दुःखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ हुआ …

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती नन्ही चींटीं जब दाना …

साजन आए, सावन आया

अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं, साजन आए, सावन आया। धरती की जलती साँसों ने मेरी साँसों में ताप भरा, सरसी …

पथ की पहचान

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी, हाल इसका ज्ञात …

प्रतीक्षा

मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता? मौन रात इस भाँति कि जैसे, कोई गत वीणा …

मैं स्वयं बन मेघ जाता

‘मेघ’ जिस-जिस काल पढ़ता मैं स्वयं बन मेघ जाता! 1 हो धरणि चाहे शरद की चाँदनी में स्नान करती, वायु …

मधुबाला

1 मैं मधुबाला मधुशाला की, मैं मधुशाला की मधुबाला! मैं मधु-विक्रेता को प्यारी, मधु के धट मुझ पर बलिहारी, प्यालों …

नवीन वर्ष

तमाम साल जानता कि तुम चले, निदाघ में जले कि शीत में गले, मगर तुम्हें उजाड़ खंड ही मिले, मनुष्य …

निर्माण

नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्वान फिर-फिर! वह उठी आँधी कि नभ में छा गया सहसा अँधेरा, धूलि धूसर …

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

हो जाय न पथ में रात कहीं, मंजिल भी तो है दूर नहीं – यह सोच थका दिन का पंथी …

नए वर्ष की शुभ कामनाएँ

(वृद्धों को) रह स्वस्थ आप सौ शरदों को जीते जाएँ, आशीष और उत्साह आपसे हम पाएँ। (प्रौढ़ों को) यह निर्मल …