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हरिवंश राय बच्चन Archives - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

मधुशाला

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१।…

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साथी, सब कुछ सहना होगा!

मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधों में रहना होगा! साथी, सब कुछ सहना होगा! हम क्या हैं जगती के सर में! जगती…

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साथी, नया वर्ष आया है

वर्ष पुराना, ले, अब जाता, कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता दे जी भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख पाया है! साथी, नया वर्ष आया है! उठ इसका स्वागत करने को, स्नेह बाहुओं…

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संवेदना

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी ? क्या करूँ ? मैं दुःखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ हुआ हमेशा रीति दोनों ने निभाई, किंतु इस आभार का अब हो उठा है…

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हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती नन्ही चींटीं जब दाना ले कर चढ़ती है चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है मन का…

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साजन आए, सावन आया

अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं, साजन आए, सावन आया। धरती की जलती साँसों ने मेरी साँसों में ताप भरा, सरसी की छाती दरकी तो कर घाव गई मुझ पर गहरा, है नियति-प्रकृति की…

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पथ की पहचान

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी, हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी, अनगिनत राही गए इस राह से, उनका…

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प्रतीक्षा

मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता? मौन रात इस भाँति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर, अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर और…

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मैं स्वयं बन मेघ जाता

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता मैं स्वयं बन मेघ जाता! 1 हो धरणि चाहे शरद की चाँदनी में स्नान करती, वायु ऋतु हेमन्त की चाहे गगन में हो विचरती, हो शिशिर चाहे गिराता पीत-जर्जर…

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मधुबाला

1 मैं मधुबाला मधुशाला की, मैं मधुशाला की मधुबाला! मैं मधु-विक्रेता को प्यारी, मधु के धट मुझ पर बलिहारी, प्यालों की मैं सुषमा सारी, मेरा रुख देखा करती है मधु-प्यासे नयनों की माला।…

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दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

हो जाय न पथ में रात कहीं, मंजिल भी तो है दूर नहीं - यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है! दिन जल्दी-जल्दी ढलता है! बच्चे प्रत्याशा में होंगे, नीड़ों…

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नए वर्ष की शुभ कामनाएँ

(वृद्धों को) रह स्वस्थ आप सौ शरदों को जीते जाएँ, आशीष और उत्साह आपसे हम पाएँ। (प्रौढ़ों को) यह निर्मल जल की, कमल, किरन की रुत है। जो भोग सके, इसमें आनंद बहुत…

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नव वर्ष

नव वर्ष हर्ष नव जीवन उत्कर्ष नव। नव उमंग, नव तरंग, जीवन का नव प्रसंग। नवल चाह, नवल राह, जीवन का नव प्रवाह। गीत नवल, प्रीति नवल, जीवन की रीति नवल, जीवन की…

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नवीन वर्ष

तमाम साल जानता कि तुम चले, निदाघ में जले कि शीत में गले, मगर तुम्हें उजाड़ खंड ही मिले, मनुष्य के लिए कलंक हारना। अतीत स्वप्न, मानता, बिखर गया, अतीत, मानता, निराश कर…

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